दुग्ध उत्पादकों से भेदभाव कर रही है कांग्रेस : निहाल

मंडी। भाजपा सरकार ने अपने शासनकाल में दूध के खरीद मूल्य में ऐतिहासिक सात रुपये बढ़ोतरी करके किसानों की आर्थिक दशा को सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाया था। लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही दुग्ध उत्पादकों का शोषण शुरू कर दिया है। यह बात प्रदेश मिल्क फेडरेशन के पूर्व निदेशक एवं दुग्ध उत्पादक सहकारी सभा के अध्यक्ष निहाल चंद ने कही। कहा कि सरकार दुग्ध उत्पादकों के खरीद मूल्य में शीघ्र दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करें। भाजपा सरकार ने पांच सालों में सात रुपये की बढ़ोतरी की थी। कांग्रेस शासन में एक रुपये की घोषणा करने के बाद महज 3.5 और 7.5 पैसे की वृद्धि की। यह गरीब किसानों के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हॉस्टन गाएं ज्यादा हैं। इनकी फैट तीन से ज्यादा नहीं आती और एसएनएफ 7.0 तक रहती है। इस क्वालिटी का दूध विभाग रिजेक्ट कर देता है।
उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर 2013 तक इस गुणवत्ता वाले दूध की कीमत मात्र 13 रुपए 51 पैसे है। भाजपा के शासन में इस दूध की गुणवत्ता की कीमत 14.83 रुपये थी। कहा कि मंत्रियों और विधायकों ने अपने वेतन भत्ते हजारों की तादाद में बढ़ा दिए। वहीं दुग्ध उत्पादकों के दूध की कीमत 1.25 रुपये प्रति लीटर कम कर दी। दूसरी ओर मिल्क फेडरेशन ने अपने दूध, घी, पनीर, मक्खन के मूल्यों में भारी भरकम बढ़ोतरी कर दी है। भाजपा के समय जहां मिल्क फेडरेशन ने ऊंचाईयों को छूते हुए कई प्लांट, चिलिंग सेंटर, पाउडर प्लांट और फीड प्लांट बनाए। लोस चुनाव में प्रदेश के 50 हजार दुग्ध उत्पादक अपनी इस उपेक्षा का जवाब कांग्रेस को देंगे।

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